एशिया में लगभग 2000 भाषाएँ बोली जाती हैं जिन्हें भिन्न भाषाई परिवारों में बाँटा गया है। इनमें से कुछ तो सिर्फ़ एशिया महाद्वीप में पाए जाते हैं व बाकि महाद्वीप को विश्व से जोड़ते हैं। सिर्फ़ एशियाई महाद्वीप पर पाए जाने वाले परिवार हैं:
• आलताइक परिवार, जिसमें तुर्की, मोंगोली और मान्चु हैं।
• द्रविड़ परिवार जो भारत के दक्षिण व श्रीलंका में है, तमिल या मलयालम भाषायों के साथ।
• सिनो-तिब्बती परिवार जिसमें बाकी भाषायों के अलावा चीनी, बर्मी व तिब्बती भाषाएँ हैं।
• औस्ट्रो-एशियाई परिवार जिसमें विएतनामी, लाओसी और ख्मेर जैसी भाषाएँ हैं। कुछ लेखक इसे औस्ट्रोनेशी से व दाइका (थाईलैंडी) से संबंधित पाते हैं व एक विशाल औस्ट्रो समूह का प्रस्ताव रखते हैं।
• अंत में चुकची-कामाश्त्का भाषाएँ हैं जो लगभग पूरी तरह से विलुप्त हो चुकी हैं।
महाद्वीप से आगे विस्तृत भाषा परिवार इस प्रकार से हैं:
• अफ्रीकी-एशियाई, अफ्रीका के साथ सबसे मज़बूत नाते के रूप में अरबी को लिए हुए।
• भारतीय-यूरोपीय, फारसी, कुर्द, हिंदी, बांग्ला, उर्दु, पश्तो, नेपाली, वगैरह भाषाएँ जो यूराली परिवार के साथ मिलकर (जिसमें ओसेत, मान्सी, चांति है) यूरोप के साथ एक भाषाई नाता बनाता है।
• एस्कीमो-आलेउता परिवार – युपिक – एशिया को अमरीका से जोड़ता है।
• औस्ट्रोनेशी परिवार जिसमें इन्डोनेशियाई, मलय, टागालोग या जावा जैसी भाषाएँ हैं, बाकि सब के अलावा, जो एशिया महाद्वीप को ओशियानिया से जोड़ता है।
भाषाई परिवारों में सम्मिलित भाषायों के अलावा कुछ और भी हैं जिनके स्रोत साफ़-साफ़ नहीं पता चलें हैं, जैसे जापानी, कोरियाई, आइनु, गिलियाक या फिर बुरुशास्की।
जहाँ तक भाषायों के बोलने वालों की संख्या का सवाल है एशिया महाद्वीप पर बहुत विविधताएँ मिलती हैं। कुछ भाषाएँ हैं जिनके आखरी बोलने वाले ही बचे हैं, जैसे साइबेरिया की कुछ भाषाएँ, और कुछ हैं जो विश्व की सबसे ज़्यादा बोले जाने वाली भाषाएँ हैं, जैसे चीनी या फिर हिंदी। यह ध्यान देने की बात है कि विश्व की पांच सबसे ज़्यादा बोले जाने वाली भाषायों में से तीन – चीनी, हिंदी व बांग्ला – एशिया की हैं।
जहाँ तक दर्जे का सवाल है एशिया की आधिकारिक भाषाएँ अधिकतर देशों में स्थानिक हैं। इस वजह से बहुत सी स्थानीय भाषाएँ दूसरी स्थानीय भाषायों के दबाव से ख़तरे में हैं, जबकि औपनिवेशिक भाषायों से नहीं, जैसा कि दूसरे महाद्वीपों में हो रहा है। इसके बावजूद भी ऐसे देश भी हैं जहाँ अंग्रेज़ी या फ्रांसीसी जैसी भाषाएँ आधिकारिक हैं। व अंग्रेज़ी बहुत से देशों में सह-आधिकारिक है जैसे भारत, पाकिस्तान व सिंगापुर जबकि फ्रांसीसी कंबोडिया या विएतनाम जैसे देशों में मान्यता प्राप्त भाषा है।
एशियाई भाषायों ने दुनिया की भाषायों को बहुत से शब्द दिए हैं, जैसे तूफान, चाय (चीनी), जंगल, शैंपू (हिंदी), आम (तमिल), लांचा, कारांबोला (मलय), खाकी, बोनसाई (जापानी), साग, प्याला (फारसी), जूता, कुश्क (तुर्की), लामा (तिब्बती), पांडा (नेपाली), मामुत (ओसेत), व बहुत से और भी।